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रंग-बिरंगी तितली

रंग-बिरंगी तितली आई
नन्हे-मुन्ने के मन भाई
छेड़ के मुन्ने को उड़ जाए
उसको अपने पीछे भगाए

कोयल

कुहु-कुहु करके बोले कोयल
मीठे गीत से मोह लेती दिल
बैठे जब अम्बुआ की डाली
कितनी प्यारी कोयल काली

मोर

झूम-झूम के नाचे मोर
जब छाएँ बादल घनघोर
अपने सुन्दर पन्ख फैलाता
देख के उसको आनन्द आता