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बन्दर ,चूहे और बिल्ली

बन्दर ,चूहे और बिल्ली

शान से आए बन्दर मामा
ढीला ढाला पहन पजामा
टोपी और कुर्ता भी पहना
बन्दरिया ने पहना गहना
निकले दोनो बींच बजार

मिल गए उनको चूहे चार
हँस कर करने लगे वो बातें
बन्दरिया कीउड़ गई रातें
बन्दर भी मन मे पछताया
क्यों वो बन्दरिया को लाया
गया वो बिल्ली बहन के पास

बोला बहना हूँ उदास
उसको सारी बात बताई
बिल्ली भी गुस्से मे आई
गई वो भाई के संग बजार
खड़े हुए थे चूहे चार

जब तक वो कोई बात समझते
बिल्ली बन्दर उन पर झपटे
उन चारों को मार गिराया
और फिर बड़े मजे से

चूहे आए सौ.

बिल्ली नाटक देख रही थी

चूहे आए सौ

बिल्ली बोली, मिला न चूहा

बीत गए बरसों

बिल्ली कुछ आगे को आई

चूहे टूट पड़े

घाव हुए चेहरे पर उसके

काफी बड़े-बड़े

नाटक देखे बिना वहाँ से

भाग गई बिल्ली

सौ चूहे थे, सबने उसकी

जी भर ली खिल्ली।

चूहे आए सौ...

बिल्ली नाटक देख रही थी - चूहे आए सौ
बिल्ली बोली, मिला न चूहा - बीत गए बरसों
बिल्ली कुछ आगे को आई - चूहे टूट पड़े
घाव हुए चेहरे पर उसके - काफी बड़े-बड़े
नाटक देखे बिना वहाँ से - भाग गई बिल्ली
सौ चूहे थे, सबने उसकी - जी भर ली खिल्ली।